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कॉर्पोरेट विडियो प्रेजेंटेशन बनवाने से पहले

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वीडियो आज की दुनिया के लिए कितना महत्वपूर्ण हो गया है, यह बात अब छिपी हुई नहीं है. टेलीविजन के तमाम चैनलों को छोड़ भी दें तो यूट्यूब और फेसबुक पर वीडियो देखा जाना नित नए रिकॉर्ड बनाता जा रहा है. एक आंकड़े के अनुसार फेसबुक पर प्रतिदिन 8 बिलियन वीडियो व्यूज होता है, जबकि यूट्यूब पर 5 बिलियन वीडियो व्यू किया जाता है.

जाहिर है, इस छोटी-बड़ी मार्किट को टारगेट करने के लिए तमाम कंपनियां बेचैन होती हैं और उन्हें बेचैन होना भी चाहिए, क्योंकि उन कंपनियों के कस्टमर-ऑडियंस / डीलर्स का काफी समय ऑनलाइन-वीडियो देखने में व्यतीत होता है.

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि 'फर्स्ट इम्प्रैशन इज लास्ट इम्प्रैशन' वाली कहावत यहाँ भी चरितार्थ होती है. मतलब साफ़ है कि अगर आपका 'कॉर्पोरेट वीडियो प्रेजेंटेशन' पहली नज़र में सही ढंग से अपनी बात नहीं कह पाया तो फिर कहाँ तक ठीक इम्प्रैशन पड़ेगा, बल्कि कई दफा नेगेटिव प्रभाव ही पड़ जाता है.

जाहिर है कि प्रोफेशनल वीडियो शूट का यह तात्पर्य कतई नहीं है कि आप अपनी मोबाइल अथवा कैमरा उठाएं और उसे इधर उधर घुमा दें, ऊपर-नीचे घुमा दें और आपकी प्रोफेशनल वीडियो शूट तैयार हो जाएगी, एक प्रेजेंटेशन तैयार हो जाएगी... बल्कि प्रोफेशनल वीडियो सूट में कुछ चीजें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं. आइये देखते हैं कि वह क्या हैं:

स्क्रिप्ट
कॉर्पोरेट वीडियो प्रेजेंटेशन का ख्याल आते ही आप ज़रूर सोचें कि आखिर आप क्या दिखाना चाहते हैं अपने दर्शकों को?
अपने से जुड़े क्लाइंट्स को, एम्प्लॉयीज को या फिर जो दूसरे डायरेक्ट / इनडायरेक्ट लोग हैं उनको?

वह संदेश बेहद स्पष्ट होना चाहिए. ध्यान रहे, अगर संदेश / कॉर्पोरेट वीडियो की थीम स्पष्ट नहीं होती है तो फिर आपकी प्रोफेशनल वीडियो शूट का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा. सन्देश जब आपके माइंड में क्लियर हो जाए तो तत्काल आप उसे नोट करें, एक कहानी / स्क्रिप्ट (पटकथा) के फॉर्मेट में.

स्क्रिप्ट लिखने का फायदा यह होगा कि समूची वीडियो का स्टोरी-बोर्ड आपके सामने शीशे की तरह साफ़ हो जायेगा. एक सीक्वेंस के बाद दूसरा सीक्वेंस और फिर उसका अगला...

प्रोफेशनल वीडियोग्राफी
कॉर्पोरेट वीडियो प्रेजेंटेशन में स्क्रिप्ट के बाद दूसरी चीज जो बेहद महत्वपूर्ण होती है वह होती है वीडियोग्राफी की क्वालिटी. हाथ में लेकर मोबाइल से किया गया शूट अक्सर वह क्वालिटी नहीं दे पाता है, जो आपके बिज़नेस के लिए आवश्यक होता है. हालाँकि, पर्सनल ब्लॉगिंग, फेसबुक लाइव इत्यादि के लिए यह ज़रूर बेहतर ऑप्शन है... पर कॉर्पोरेट वीडियो प्रेजेंटेशन के लिए 'प्रोफेशनल वीडियोग्राफी' कराना ही ठीक रहेगा.
आखिर, यह आपकी बिज़नेस ब्रांडिंग से जुड़ा है.

आप अक्सर देखते होंगे कि प्रोफेशनल वीडियो शूट करने वाले ट्राइपॉड, स्टेबलाइजर अथवा गिंबल... यहां तक कि आज-कल 'ड्रोन' तक का उपयोग करने लगे हैं.
जाहिर है एक बेसिक ट्रेनिंग और वीडियो एंगल की जानकारी होना आवश्यक है कॉर्पोरेट वीडियो शूट के लिए.

कॉम्पैक्ट एडिटिंग
इसके बाद जो चीज महत्वपूर्ण होती है वह होती है वीडियो की एडिटिंग.
इसे आप 1 तरीके से 'कट लगाना' बोल सकते हैं!
बदलते जमाने में समय सबके पास कम हो चला है. इस एज में अगर आप कम समय में बेहतरीन इंफॉर्मेशन, टार्गेटेड इनफॉरमेशन नहीं दे पाते हैं तो फिर इस चीज का अर्थ खत्म हो जाता है कि वीडियो आप की कितनी लंबी है. स्क्रिप्ट और वीडियो शूट की अहमियत अपनी जगह ठीक है, किन्तु असली तस्वीर एडिटिंग के समय ही सामने आती है और इस लिहाज से इसकी अहमियत फाइनल स्टेज पर काफी बढ़ जाती है.

यहीं आपको पता चलता है कि एक्साक्ट्ली आपने क्या मिस किया है, आपकी वीडियो-रेसिपी में से कौन सा ग्रेडिएंट मिसिंग है.

एक बार में एक 'मेसेज'
आपका ऑडियंस कौन है और उस तक आप क्या मेसेज पहुंचाना चाहते हैं, यह बात बेहद स्पष्ट तरीके से शूट में होनी चाहिए. एक वीडियो में एक साथ कई संदेश को घुसेड़ने से बचना चाहिए. इसका मतलब यह है कि कई बार एक ही वीडियो में लोग कई सारी बातें करने की कोशिश करते हैं, कई सारी चीजें बताने की कोशिश करते हैं जो लॉजिकली गलत है और इससे आगे कहा जाए तो टार्गेटेड कस्टमर पर वह सही असर छोड़ने में विफल रहती है.

एक उदाहरण से समझा जा सकता है कि अगर एक कंपनी कई चीजों का निर्माण करती है तो वह सभी चीजें एक ही वीडियो में इंक्लूड कर दे... यह ठीक प्रभाव वाली वीडियो बनने की बजाय, 'खिचड़ी' सी बन जाती है, जो ऑडियंस को बांधे रखने में सफल नहीं हो पाती है.

इन बिंदुओं के अतिरिक्त, आप को ठीक वीडियो-प्लेटफार्म का चुनाव करने में सावधानी बरतने की आवश्यकता भी पड़ेगी. फेसबुक और यूट्यूब दोनों पर निश्चित ही वीडियो देखे जाते हैं, किन्तु दोनों के ऑडियंस में फर्क है. यूट्यूब पर जहाँ ऑडियंस को टारगेट कर पाना और रिलेटेड वीडियो पर ही फोकस रखना आसान होता है, वहीं फेसबुक पर ऑडियंस में 'भटकाव' भी नज़र आता है.
हालाँकि, फेसबुक पर वीडियो को बूस्ट करना अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है, जबकि यूट्यूब पर पेड-व्यूज लाना  एक महंगा सौदा है.

इसके अतिरिक्त कॉर्पोरेट वीडियो प्रेजेंटेशन में और क्या मुख्य बातें हो सकती हैं, कमेंट-बॉक्स में अवश्य बताएं.

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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Corporate Video Presentation, Important Points (Pic: allabouttherock.co.uk)

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